Meerut News: पर्यावरण दिवस पर ‘पीपल की छांव में’ से हरियाली का संदेश


मेरठ। क्रांतिधरा समेत देश के कई हिस्सों में हरियाली की अलख जगा रहे पीपल बाबा उर्फ स्वामी प्रेम परिवर्तन ने अपने पर्यावरण संरक्षण के अनुभवों को किताब ‘पीपल की छांव में’ में समेटा है। लगभग पांच दशक से प्रकृति संरक्षण में जुटे पीपल बाबा अब तक 2.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ढाई करोड़ से अधिक पेड़ और उतनी ही झाड़ियां लगाने का कार्य कर चुके हैं।

उन्होंने सेना के साथ मिलकर मेरठ की 18 से 20 यूनिटों में पौधारोपण कराया है। इसके अलावा किचन गार्डन एसोसिएशन के सहयोग से साकेत और बाउंड्री रोड पर दो माइक्रो फॉरेस्ट विकसित किए गए हैं। कई स्कूलों में भी हरियाली अभियान चलाया गया है।

यूपी पर्यटन विभाग की ओर से हस्तिनापुर में पौधारोपण का प्रस्ताव भी उन्हें मिला है। हालांकि वहां फिलहाल सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है, जिसके बाद पौधे लगाए जाएंगे।

गिव मी ट्रस्ट के वेस्ट यूपी और उत्तराखंड प्रोजेक्ट मैनेजर जगदीश ठाकुर ने बताया कि मेरठ के पल्लवपुरम स्थित उल्देपुर में वर्मी कंपोस्ट प्लांट संचालित है, जहां साढ़े तीन सौ बेड्स पर हर महीने 60 से 70 टन खाद का उत्पादन होता है। इस परियोजना से 10 महिलाओं को रोजगार भी मिला है।



उन्होंने बताया कि पीपल बाबा के नेतृत्व में मोदीनगर फॉरेंसिक साइंस लैब निवाड़ी में 10 हजार पेड़ लगाए गए हैं। इसके अलावा खतौली के जानसठ रोड स्थित उमरपुर लिसोड़ा गांव में एक सेंटर नर्सरी भी विकसित की गई है।

पीपल बाबा का कहना है कि बचपन से ही पीपल का पेड़ उन्हें आकर्षित करता रहा है। उन्होंने पिछले 48 वर्षों को पौधारोपण, संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को समर्पित किया है। उनका कहना है कि यह पुस्तक उनके प्रकृति से लंबे जुड़ाव और अनुभवों को साझा करने का माध्यम है।

उन्होंने बताया कि बचपन में नानी की वजह से उन्हें उत्तराखंड के जंगलों, कॉर्बेट, राजाजी, हरिद्वार, ऋषिकेश, नरेंद्र नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और अल्मोड़ा जैसे क्षेत्रों को करीब से देखने का अवसर मिला। बाद में उनका परिवार हिमाचल प्रदेश के डलहौजी चला गया, जहां प्रकृति के प्रति उनका लगाव और गहरा हुआ।

पीपल बाबा ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में भी वह प्रकृति से दूर नहीं रह सके। वह पौधों को पानी देते, धूप महसूस करते और हवा से ऐसे बात करते जैसे वह उनकी पुरानी मित्र हो। उनका मानना है कि प्रकृति ने इंसानों को खुले आसमान के लिए बनाया है, न कि कैद में रहने के लिए।

यह पुस्तक Penguin Random House India द्वारा प्रकाशित की जा रही है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जैसे amazon.in⁠� पर उपलब्ध होगी।

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