चरित्र निर्माण शिविर में वीर बंदा बहादुर के बलिदान को किया गया नमन, बच्चों को राष्ट्र एवं प्रकृति संरक्षण का संदेश



बस्ती: सनातन धर्म संस्था, बस्ती द्वारा श्री दुर्गा मंदिर, दुबौली दूबे परिसर में आयोजित शारीरिक, बौद्धिक एवं चरित्र निर्माण शिविर में आज वीर योद्धा बंदा सिंह बहादुर (बंदा वैरागी) के बलिदान दिवस पर उनके अद्वितीय साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति को स्मरण किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में बालक-बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए शारीरिक प्रशिक्षण के साथ-साथ प्रेरणादायी बौद्धिक सत्रों का लाभ प्राप्त किया।

बौद्धिक प्रमुख पंकज त्रिपाठी ने "राष्ट्र की स्थिति और हमारे दायित्व" विषय पर बच्चों को संबोधित करते हुए वीर बंदा बहादुर के जीवन संघर्ष और बलिदान की प्रेरक गाथा सुनाई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान का प्रतिशोध लेने के लिए बंदा बहादुर मुगल अत्याचारों के विरुद्ध एक प्रचंड शक्ति बनकर खड़े हुए। उन्होंने बच्चों को उनके अदम्य साहस, राष्ट्रनिष्ठा और धर्मरक्षा के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान से परिचित कराया तथा कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिए जिससे राष्ट्र, समाज अथवा धर्म की हानि हो।

उन्होंने बच्चों को श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का अभ्यास कराते हुए बताया कि ज्ञान, कर्म और भक्ति का समन्वय ही व्यक्ति को श्रेष्ठ बनाता है।

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. वीरेंद्र त्रिपाठी ने बच्चों को प्राथमिक उपचार, दैनिक जीवन में स्वास्थ्य सुरक्षा तथा आसपास उपलब्ध औषधीय जड़ी-बूटियों के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हमारे आसपास अनेक दुर्लभ और उपयोगी वनस्पतियां उपलब्ध हैं, लेकिन जानकारी के अभाव में हम उनका समुचित उपयोग नहीं कर पाते। उन्होंने बच्चों को प्रकृति संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि "प्रकृति है तो जीवन है" और मानव जीवन की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रकृति ने सब कुछ प्रदान किया है, इसलिए उसकी रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।

शिविर के मुख्य व्यायाम प्रशिक्षक विनय पँवार तथा प्रशिक्षक पूजा अग्रहरि, मान्यता, श्री, विधि, आयुष, शीतल, मानवी, अनुज और अंकिता के निर्देशन में बच्चों को सर्वांगसुंदर व्यायाम, भूमि नमस्कार, सूर्य नमस्कार, जूडो-कराटे, लाठी, तलवार, एयरगन से निशानेबाजी, आत्मरक्षा के गुर, कमांडो प्रशिक्षण, रस्सी अभ्यास, पीटी एवं परेड में पदसंचलन का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों में अनुशासन, साहस, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।

सनातन धर्म संस्था के सदस्यों ने बताया कि शिविर का उद्देश्य केवल शारीरिक प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि बच्चों में राष्ट्रप्रेम, संस्कार, चरित्रबल, आत्मरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में एक सशक्त, संस्कारित और जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

संस्था के पदाधिकारियों ने कल सायं 4 बजे शिविर के समापन सत्र में अभिभावकों से पहुंचने का आग्रह किया।

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