CBSE की नई तीन-भाषा नीति का सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग बस्ती ने किया स्वागत

 


बहुभाषी एवं भविष्य-तैयार भारत की दिशा में महत्वपूर्ण पहल : गोविंद सिंह


बस्ती: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP-2020) एवं NCFSE-2023 की भावना को साकार करते हुए CBSE द्वारा लागू की जा रही नई तीन-भाषा नीति (R1-R2-R3) का सरस्वती विद्या मंदिर रामबाग बस्ती में उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों, अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने इस नीति को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।


विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं City Coordinator CBSE Basti श्री गोविंद सिंह ने कहा कि नई भाषा नीति विद्यार्थियों को मातृभाषा, भारतीय भाषाओं एवं वैश्विक भाषा—तीनों में संतुलित दक्षता प्रदान करेगी। उन्होंने कहा—


“आज के समय में बहुभाषिक शिक्षा अत्यंत आवश्यक हो गई है। CBSE की यह नीति विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और अपनी जड़ों से जोड़े रखते हुए उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्षम बनाएगी। हमारा विद्यालय इस नीति को सरल, छात्रहितकारी और गतिविधि-आधारित तरीके से लागू करेगा।”


विद्यालय के आचार्य श्री अंकित कुमार गुप्ता ने कहा कि भाषा केवल पढ़ाई का विषय नहीं, बल्कि विचारों और संस्कृति को समझने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि विद्यालय में तीसरी भाषा (R3) को संवाद-केंद्रित एवं रुचिकर पद्धति से पढ़ाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे बच्चों पर अतिरिक्त मानसिक दबाव न पड़े और वे सहज रूप से नई भाषाएँ सीख सकें।


इस अवसर पर विद्यालय के अभिभावक श्री राजेंद्र जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा—“नई भाषा नीति बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। जब बच्चे अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं से जुड़े रहेंगे, तब उनमें संस्कार, संस्कृति और देश के प्रति सम्मान की भावना स्वतः विकसित होगी।”


वहीं अभिभावक के रूप में श्री प्रदीप जी ने भी कहा—“CBSE की यह पहल बच्चों को केवल भाषाई रूप से ही मजबूत नहीं बनाएगी, बल्कि उनके आत्मविश्वास, संचार-कौशल और व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह नीति आने वाले समय में विद्यार्थियों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।”


विद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि तीसरी भाषा (R3) के लिए कोई अलग बोर्ड परीक्षा नहीं होगी तथा इसका मूल्यांकन विद्यालय स्तर पर ही किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों पर अनावश्यक परीक्षा-दबाव नहीं बढ़ेगा और वे सीखने की प्रक्रिया का आनंद ले सकेंगे।

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