उत्तर प्रदेश के बलिया जनपद के बेदुआ मोहल्ले में इन दोनों अंग्रेजी और देशी शराब की दुकान को लेकर भारी जन आक्रोश देखने को मिला रहा है। पिछले 40 सालों से शराबखाने की वजह से नारकीय जीवन जी रहे स्थानीय लोगों का सब्र आखिरकार टूट गया है। शासन और प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने से नाराज महिलाओं और युवाओं सहित पूरे मोहल्ले के लोग अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए है।
स्थानीय आंदोलनकारी गिरजा शंकर राय का कहना है, यह पूरे मोहल्ले की एक छोटी सी और जायज मांग है। हम पिछले 40 वर्षों से इस शराब खाने के कारण जो पीड़ा सह रहे है, सरकार उससे हमें मुक्ति दिलाए और इसे किसी अन्य स्थान पर शिफ्ट करें।
गूगल पर दर्ज होगा यूपी का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन
प्रदर्शन कार्यों का दावा है कि अगर मोहल्ले के लोग इसी तरह एकजुट और डटे रहे, तो इंटरनेट और गूगल पर शराब के खिलाफ इस ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन को जनपद में पहला और पूरे उत्तर प्रदेश में पहला या दूसरा स्थान प्राप्त होगा। आंदोलन को मोहल्ले की महिलाओं का व्यापक समर्थन मिल रहा है।आप को बता दे कि पिछले 30 दिनों से बेदुआ मुहल्ले के लोगो का विरोध प्रदर्शन जारी है। इसी क्रम में अब क्षेत्र के लोग अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए है।
वादे अनेक, कार्रवाई शून्य
आपको बता दे कि 15-20 दिन पहले विरोध के क्रम में पुतला दहन के दौरान सिटी मजिस्ट्रेट ने दो-तीन दिनों के भीतर शराब दुकान हटाने का श्वसन दिया था जो हवाई साबित हुआ। बताया 2-3 दिन पहले एसडीएम ने भी मौके का मुआयना किया था, जिनकी बातों से लगा कि वह दुकान हटाने के पक्ष में है। भूख हड़ताल शुरू करने से पहले जिला अधिकारी को भी लिखित पत्रक सौंपकर स्थित से अवगत कराया जा चुका है। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि जब तक सरकार की ओर से लिखित रूप से शराब खाना हटाने का आदेश नहीं मिल जाता तब तक यह भूख हड़ताल अनवरत जारी रहेगा।
इस शराबखाने से क्यों परेशान है पूरा मुहल्ला
भूख हड़ताल पर बैठे मोहल्ले के लोगों कहना है कि बेदुआ का यह शराब खाना पूरे जिले में सबसे बदनाम और गंदा माना जाता है। बताया यहां 20 से 25 किमी दूर से आवारा और शराबी किस्म के लोग आते हैं। नशे में धुत लोग सड़क किनारे यहां वहां पड़े रहते हैं। शराबखाने के आस-पास जुटने वाली भीड़ के कारण महिलाओं और स्कूल कोचिंग जाने वाले बच्चों का रास्ता चलना मुश्किल हो गया है। उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग और छेड़खानी जैसी घटना यहां आम बात हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब से धरना शुरू हुआ है तब से सड़क साफ और शांत है। बताया हम लोगों ने संगम से गंगाजल मंगाया है जिस दिन यह शराबखाना यहां से हटेगा उसी दिन बेदुआ बंधे पर पीपल के पेड़ तक दोनों तरफ गंगा जल छिड़क कर मार्ग को पूरी तरह शुद्ध किया जाएगा।
आखिर क्यों नही हट रही दुकान
गिरिजा शंकर राय का मानना है कि सरकार इसे सिर्फ राजस्व और व्यवसाय के नजरिया से देख रही है। अधिकारियों को शायद यह डर है कि एक जगह से दुकान हटाने पर पूरे जिले में ऐसी मांगे उठने लगेंगे, हालांकि आंदोलनकारियों ने प्रशासन के सामने एक बीच का रास्ता भी रखा है। मोहल्ले वालों ने खुद प्रशासन को बेदुआ में ही अन्य खली और सुरक्षित जगहों के विकल्प सुझाएं है जहां इस दुकान को शिफ्ट किया जा सकता है। इससे सरकार का राजस्व भी प्रभावित नहीं होगा और महिलाओं को, बच्चों को एक सुरक्षित माहौल भी मिल सकेगा।
अब देखना यह है कि बलिया जिला प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब जगाता है और भूख हड़ताल पर बैठे लोगों को कब न्याय मिलता है।
